Saturday, March 14, 2015

Place Influences our Thoughts

गीता की व्याख्या लिखने वाले अक्सर पहले अध्याय को भूमिका मानकर उसकी उपेक्षा कर देते हैं । सत्यनारायण दास जी ने गीता के प्रथम अध्याय पर पूरी किताब The Yoga of Dejection लिखी है।
एक कहानी का उल्लेख करते हुये बताते हैं कि स्थान व्यक्ति के विचारों को प्रभावित करता है ।एक बार पाण्डव वन में टहल रहे थे ।एक जगह नदी तट पर रुके जहां से भीम नदी के पार चला गया ।उसे विचार आया कि उनकी दुर्दशा युधिष्ठर के कारण हुई है हम चार भाईयों ने क्या किया है? बहुत देर सोचने के बाद भीम वापस आ गया । आकर उससे रहा नहीं गया। उसने आश्चर्य व्यक्त किया कि भाई के बारे में वो ऐसा सोच कैसे सकता है? उसने भाईयों से बताया आज उसे कैसे खयाल आये ।तब युधिष्ठर ने समझाया कि गल्ती तुम्हारी नहीं वह स्थान ही ऐसा था ।विचारों पर जगह का असर होता है ।यह सच है जब हम बहते झरने के पास, जंगल में, अस्पताल में या किसी साधु के आश्रम में जाते हैं तो अलग अलग खयाल आते हैं जिसमें उस जगह की भूमिका होती है ।

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