Sunday, March 15, 2015

अपात्र को ज्ञान नहीं देना चाहिये।

एक गंधी था । वह किसी गाँव में इत्र बेचने चला गया । लोगों ने कहा - पहले दिखाओ तो लेने की सोचेंगे । उसने छोटी सी शीशी निकाली और आगे बढाई । लोगों ने उसे हथेली पर लगा कर चखा और कहा- यह तो बङा स्वाद है ।गंधी बहुत दुखी हुआ। रहीम जी ने देखकर कहा-

करि फुलेल को आचमन मीठो कहत सराहि ।
रे गंधी मति अंध तू इत्र दिखावत काहि ।

अपात्र को ज्ञान बाँटकर अपना समय बर्बाद करना है। गीता अर्जुन के बाद सबसे पहले धृतराष्ट्र ने संजय से सुनी थी । उसे कोई फर्क नहीं पङा ।

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